स्लाटर हाउस नहीं बना सकते तो उत्तराखंड को शाकाहारी प्रदेश घोषित कर दो: हाईकोर्ट

नैनीताल: स्लाटर हाउस मामले को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से प्रस्तुत किए गए शपथपत्र पर सख्त नाराजगी व्यक्त की. कोर्ट ने कहा कि यदि सरकार स्लाटर हाउस नहीं बना सकती है तो प्रदेश को शाकाहारी घोषित कर दे. दरअसल, हाईकोर्ट प्रदेश में स्लाटर हाउस बनाने के आदेश 2011 में दे चुकी है, बावजूद इसके अभी तक आदेश का पालन नहीं किया जा सका है.

26 नवंबर को हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से प्रस्‍तुत किए गए शपथपत्र पर सख्‍त नाराजगी व्‍यक्‍त की. कोर्ट ने शपथपत्र पर सख्त नाराजगी जताते हुए सचिव शहरी विकास, जिलाधिकारी नैनीताल, नगरपालिका नैनीताल के अधिशासी अधिकारी, नगर आयुक्त हल्द्वानी, ईओ रामनगर, ईओ मंगलौर पालिका के खिलाफ आपराधिक अवमानना के आरोप तय करते हुए सभी को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं. बता दें कि कोर्ट में 27 नवंबर को भी सुनवाई जारी रहेगी.

इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में हुई। बता दें कि पूर्व में कोर्ट ने सभी जिलाधिकारियों को प्रदेश में अवैध रूप से संचालित बूचड़खाने और उनमें बिक रहे मीट की जांच करने के आदेश देते हुए उसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा था. लेकिन यह रिपोर्ट अभी तक कोर्ट में पेश नहीं करने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और उक्त को कारण बताओ नोटिस जारी कर 25 नवम्बर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा था.

प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली है राहत
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2011 में कोर्ट ने प्रदेश में चल रहे अवैध स्लाटर हाउसों को बंद कराने के आदेश दिए थे और सरकार को ये भी आदेश दिए थे कि मानकों के अनुरूप स्लाटर हाउसों का निर्माण करे. इस आदेश के विरुद्ध सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई परन्तु अभी तक सरकार को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिल सकी है. 2018 में कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने 72 घंटे में सभी अवैध स्लाटर हाउसों को बंद कर दिया परन्तु अभी तक मानकों के अनुरूप स्लाटर हाउसों का निर्माण नहीं किया जा सका है. सरकार के इस आदेश को मीट कारोबारियों ने खण्डपीठ में चुनौती दी जिसमें कहा गया कि सरकार ने कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया. अभी तक स्लाटर हाउस नहीं बनाए हैं जिसके कारण उनको करोड़ों का नुकसान हो रहा है.

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