हंदवाड़ा में शहीद कर्नल आशुतोष शर्मा की पत्नी बोलीं- नहीं बहाऊंगी आंसू

नई दिल्ली. हंदवाड़ा एनकाउंटर में सेना की 21 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आशुतोष शर्मा समेत पांच शहीद हो गए. हालांकि, उन्होंने दो आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया. एनकाउंटर में शहीद हुए जवानों में कर्नल आशुतोष शर्मा का नाम भी शामिल है. कर्नल आशुतोष उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के परवाना गांव के रहने वाले थे. उन्हें वीरता के लिए दो बार सेना मेडल भी मिल चुका है.

शहादत पर नहीं बहाऊंगी आंसू
कर्नल आशुतोष शर्मा की पत्नी ने कहा, ‘मुझे गर्व है कि पति देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए. उनकी शहादत पर आंसू नहीं बहाऊंगी. देश के लिए कुर्बान होना सम्मान की बात है, यह उनका फैसला था, इसका पूरा सम्मान करूंगी.’ वहीं, उनकी बेटी बोली कि आखिरी बार 1 मई को पापा से बात हुई तो उन्होंने कहा था कि ऑपरेशन खत्म कर घर लौटूंगा.

कर्नल आशुतोष बुलंदशहर के मूल निवासी थे
कर्नल आशुतोष शर्मा बुलंदशहर जिले के खानपुर थाना क्षेत्र के गांव परवाना के मूल निवासी थे. बड़े भाई पीयूष शर्मा की नौकरी के चलते मां, भाई-भाभी व पत्नी-बच्चों सहित जयपुर शिफ्ट हो गए थे. बुलंदशहर के गांव परवाना में चाचा का परिवार रहता है. बचपन से ही उनका सेना में जाने का सपना था.

आर्मी यूनिफॉर्म आशु का सपना थी
एनकांउटर में कर्नल आशुतोष के शहीद होने की खबर मिलते ही परिवारवालों की आंखें छलक पड़ीं. लेकिन, फिर उन्होंने खुद को संभाला. मीडिया से बातचीत में शहीद कर्नल की पत्नी पल्लवी ने कहा, ‘आर्मी ज्वाइन करने के बाद से आशु का पैशन और ड्रीम सिर्फ उनकी यूनिफार्म थी. ऐसे में कोई उनकी शहादत पर अफसोस जताए, यह सही नहीं है. हमें उनकी शहादत पर गर्व है.’

जयपुर आएगी पार्थिव शरीर, यहीं होगा अंतिम संस्कार
आशुतोष के भाई पीयूष शर्मा ने कहा, ‘हमारा भाई देश के लिए शहीद हुआ, यह गर्व की बात है. आशुतोष एक जांबाज अफसर थे. देशभक्ति और वीरता उनकी रग-रग में थी. पीयूष ने बताया कि आशुतोष की पार्थिव शरीर आज (4 अप्रैल) को जयपुर पहुंचेगा. यहीं उनको मुखाग्नि दी जाएगी. हमारा गांव बुलंदशहर में है. माताजी बुजुर्ग हैं, आशुतोष की बच्ची भी छोटी है. ऐसे में कोरोना की वजह से जयपुर से करीब साढ़े चार सौ किलोमीटर दूर गांव जाकर अंतिम संस्कार नहीं कर सकते.’

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