Rail Roko Andolan: बुलंदशहर में किसानों ने रोकी रेल, यात्रियों का फूलों से किया स्वागत

Rail Roko Andolan in bulandshahr

Rail Roko Andolan, बुलंदशहर: कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने आज यानी गुरुवार को बुलंदशहर के खुर्जा जंक्शन पर ‘रेल रोको आंदोलन’ (Rail Roko Andolan) के तहत कब्जा कर लिया. इस दौरान किसान-मजदूर रेल की पटरियों पर बैठ गए और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. किसानों और मजदूरों के प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया था.

किसान मोर्चा के आह्वान पर भारतीय किसान यूनियन और मजदूर संघ ने गुरुवार को बुलंदशहर के खुर्जा जंक्शन पर कब्जा कर लिया. किसान-मजदूर रेल की पटरियों पर बैठ गए. इस दौरान उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की. इस दौरान किसानों ने खुर्जा जंक्शन पर दिल्ली हावड़ा रुट पर हमसफर एक्सप्रेस ट्रेन रोककर न सिर्फ विरोध दर्ज कराया, बल्कि ट्रेन पर भारतीय किसान यूनियन का झंडा टांग दिया.Rail Roko Andolan in bulandshahr

 

किसान करीब डेढ़ घंटे तक ट्रेन रोककर ट्रेन के सामने ट्रेक पर बैठकर पंचायत करते रहे. दिलचस्प बात यह है कि रेल रोकने के बाद किसान और मजदूरों ने ट्रेन में सवार यात्रियों का फूलों से स्वागत किया. इस दौरान रेलवे स्टाफ को फूलों की माला पहनाई. इतना ही नहीं, किसानों ने यात्रियों पर पुष्पवर्षा भी की. वहीं जैसे ही प्रशासन के अफसरों को रेलवे ट्रैक पर कब्जा करने की खबर मिली तो अफ़सरों के हाथ पांव फूल गए.

हालांकि, प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हुए थे. रेलवे जंक्शन पर भारी पुलिस बल तैनात था. इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने सुरक्षा का हवाला देते हुए किसानों को ट्रेक से हटाने का प्रयास किया, लेकिन किसान नहीं माने और ट्रैक पर ही डटे रहे. वहीं, भारतीय किसान यूनियन के नेता मांगेराम त्यागी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ‘रेल रोको आंदोलन’ (Rail Roko Andolan) सरकार के कानों तक आवाज पहुंचे के लिए था.

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मांगेराम त्यागी ने कहा कि 85 दिनों से किसान धरने पर बैठे हुए, लेकिन केंद्र सरकार के कानों तक आवाज नहीं पहुंच रही है. आज का यह आंदोलन सरकार के कानों तक आवाज पहुंचाने के लिए था. उन्होंने कहा कि ठंड, बारिश और शहीद होकर भी किसान दिल्ली बॉर्डरों पर बैठे हुए है, लेकिन सरकार किसानों की बात नहीं सुनना चाहती. इस दौरान उन्होंने सराकर द्वारा बनाए गए कृषि कानूनों को काला बताया.

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