बद्रीनाथ धाम में होती है ‘पंच बद्री’ की पूजा, जानिए खास बातें

देहरादून. कोरोना वायरस महामारी और लॉकडाउन के बीच 15 मई को सुबह 4:30 बजे बद्रीनाथ धाम के कपाट खोल दिए जाएंगे। इस दौरान बदरीनाथ धाम के मुख्य पुजारी सहित 27 लोगों को मंदिर में जाने की अनुमित होगी. इसके लिए चमोली जिला प्रशासन ने सूची तैयार कर ली है. मालूम हो कि अलकनंदा नदी के किनारे स्थित यह हिंदू धर्म के चार धामों में शामिल है.

जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि बदरीनाथ धाम के मुख्य पुजारी, धर्माधिकारी, अपर धर्माधिकारी व अन्य पूजा स्थलों से जुड़े 27 लोगों को ही कपाट खोलने के दौरान मंदिर में प्रवेश की अनुमति रहेगी. इस दौरान धाम परिसर में सामाजिक दूरी का पूरी तरह से पालन किया जाएगा. प्रत्येक व्यक्ति को मास्क पहनना जरुरी होगा.

कल लक्ष्मी नारायण मंदिर से जोशीमठ पहुंचेगी यात्रा
भगवान बदरीनाथ की गाडू घड़ा (अभिषेक तेल कलश) डोली को डिम्मर गांव के लक्ष्मी नारायण मंदिर में रखा गया है. डिम्मर उमट्टा पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी ने बताया कि 12 मई को यात्रा डिम्मर गांव से रवाना होकर जोशीमठ के नृसिंह मंदिर में पहुंचेगी.

13 मई को जोशीमठ से आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी के साथ योगध्यान मंदिर पांडुकेश्वर और वहां से 14 मई को यात्रा उद्धव व कुबेर जी और शंकराचार्य की गद्दी सहित बदरीनाथ धाम पहुंचेगी. 15 मई को प्रात: 4:30 बजे मंदिर के कपाट खुलने पर भगवान का अभिषेक किया जाएगा.

यहां जलता है अखण्ड दीप
बता दें, यहां भगवान विष्णु 6 माह निद्रा में रहते हैं और 6 माह जागते हैं. बद्रीनाथ मंदिर को बद्रीनारायण मंदिर भी कहते हैं. यह मंदिर भगवान विष्णु के रूप बद्रीनाथ को समर्पित है, यहां अखण्ड दीप जलता है, जो कि अचल ज्ञानज्योति का प्रतीक है।

‘पंच बद्री’
बद्रीनाथ धाम में भगवान के 5 स्वरूपों की पूजा की जाती है. विष्णुजी के इन पंच स्वरूपों को ‘पंच बद्री’ कहा जाता है. बद्रीनाथ के मुख्य मंदिर के अलावा यहां पर अन्य 4 स्वरूपों के मंदिर भी हैं. श्री विशाल बद्री पंच स्वरूपों में मुख्य हैं.

बद्रीनाथ, भगवान विष्णु का वास
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब गंगा नदी धरती पर अवतरित हुई, तो यह 12 धाराओं में बंट गई. इस स्थान पर मौजूद धारा अलकनंदा के नाम से विख्यात हुई और यह स्थान बद्रीनाथ, भगवान विष्णु का वास बना.

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